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Personnel

FCI official language Hindi activities and the growing phase

अंग्रेजों के द्वारा लगभग 200 वर्षों की पराधीनता प्रत्येक भारतीय के लिए इतिहास का एक न भूलने वाला अध्याय है । इस दौरान भारत राजनैतिक रूप से भले ही एक हुआ, किन्तु एक समय दुनिया के सिरमौर रहे भारत का आर्थिक ढांचा अंग्रेजों के द्वारा पूरी तरह से नष्ट कर दिया गया । इन वर्षों में पड़े दसियों अकालों से तो भारत के कई सूबों की चौथाई जनसंख्या तक नष्ट हो गई । स्वाधीनता के पश्चात भारत के सामने न सिर्फ अपनी सीमाओं की रक्षा अपितु खाद्य सुरक्षा का भी प्रश्न मुंह बाए खड़ा था । ऐसी स्थिति में निम्नलिखित तथ्यों को ध्यान में रखते हुए एक खाद्य नीति बनाई गई जिसके मुख्य   उद्देश्य थे :-

 1.       किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य सुनिश्चित करना ।
2.       निजी व्यापारियों द्वारा अंतर राज्य खाद्यान्न परिचालन में प्रतिबद्धता ।
3.       जहां कहीं आवश्यकता हो खाद्यान्नों का आयात करना ।
4.       सांविधिक एवं अन्य नियंत्रण द्वारा सार्वजनिक वितरण प्रणाली को कायम रखना ।
5.       पर्याप्त मात्रा में खाद्यान्नों का बफर स्टॉक रखना ।
6.       प्रापण व्यवस्था में कुछ हद तक लचीलापन होना ।

             उपरोक्त तथ्यों को सार्थकता प्रदान करने के लिए एक ऐसे दक्ष यंत्र एक व्यवहार्य संगठन की आवश्यकता थी जो जोकि संपूर्ण भारत में फैला हुआ हो तथा एक वर्ष में करोड़ों टन खाद्यान्नों का प्रापण, संरक्षण, परिचालन, वितरण की क्षमता विकसित करने में निपुण हो । 1942 में बंगाल में पड़े अकाल के पश्चात भारत सरकार ने खाद्य विभाग की स्थापना की, जिसका कार्य उपरोक्त कुछ तथ्यों को देखना तथा उसे कार्यान्वित करना था । तत्पश्चात 1965 में भारतीय खाद्य निगम अस्तित्व में आया।

 

           भारतीय खाद्य निगम में लगभग 21870 अधिकारी एवं कर्मचारी जन हितकारी कार्यों के लिए समर्पित भाव से जुड़े हुए हैं । निगम का मुख्यालय नई दिल्ली में है । प्रशासनिक सुविधाओं के लिए निगम को 5 आंचलिक कार्यालयों, 24 क्षेत्रीय कार्यालयों तथा 162 जिला कार्यालयों में बांटा गया है, जिनके अधीन लगभग 1452 खाद्य भंडार डिपो हैं । इस तरह कश्मीर से कन्याकुमारी तथा गुजरात से अरूणाचल प्रदेश तक भारतीय खाद्य निगम एक विशाल एवं सुचारू नेटवर्क के अंतर्गत कार्य करता है । भारत सरकार की खाद्य सुरक्षा नीति के अधीन कई प्रकार की खाद्यान्न वितरण योजनाएं लागू हैं, जिनमें लक्ष्य आधारित वितरण प्रणाली के अधीन गरीबी रेखा से ऊपर (APL), गरीबी रेखा से नीचे (BPL), अंत्योदय अन्न योजना (AAY), मध्याह्न भोजन योजना (MDM), अन्नपूर्णा योजना, संपूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना, नारी निकेतन और रक्षा कार्मिकों, हितकारी संस्थाओं और छात्रावासों के लिए खाद्यान्न वितरण की योजनाएं शामिल हैं, जिनसे पूरे भारत के नागरिक लाभाविन्वत होते हैं ।      

             संविधान सभा ने 14 सितम्बर, 1949 के दिन हिन्दी भाषा को सर्वसम्मति से भारत की राजभाषा के रूप में अंगीकार किया । संविधान सभा ने हिन्दी को राजभाषा के रूप में अपनाकर समूचे राष्ट्र को गौर्वान्वित करते हुए सरकार को इसके प्रभावी कार्यान्वयन के निर्देश दिए थे । संविधान की इसी भावना को मूर्त रूप देने के लिए भारत सरकार पिछले 51 वर्षों से हिंदी के वार्षिक कार्यक्रम को लागू करने के लिये सभी विभाग/उपक्रमों को भेजती है । इसमें हर साल कुछ लक्ष्य निर्धारित किए जाते हैं । जहां तक भारतीय खाद्य निगम का प्रश्न है यह गर्व का विषय है कि निगम के अनेक कार्यालय अपना शत‑प्रतिशत कार्य हिन्दी में करते हैं । मुख्यालय में भी पिछले कई वर्षों से इस दिशा में उल्लेखनीय प्रगति हुई है । सरकार की नीति हिन्दी को प्रेरणा और प्रोत्साहन से लागू करने की है । इसके लिए भारत सरकार द्वारा जारी की गई सभी प्रोत्साहन योजनाएं भारतीय खाद्य निगम में लागू हैं । इसके अतिरिक्त निगम ने अपनी प्रोत्साहन योजनाएं भी लागू की हैं । हमें हिन्दी का कार्य दबाव से नहीं दायित्व बोध से करना है । यह हम सबका राष्ट्रीय कर्तव्य है ।  

 

      संसदीय राजभाषा समिति प्रत्येक वर्ष निगम के विभिन्न कार्यालयों में हिन्दी प्रगति का जायजा लेने के लिए निरीक्षण करती है ।  समिति ने निगम के विभिन्न कार्यालयों में किये निरीक्षण के अवसर पर  राजभाषा हिन्दी के प्रभावी अनुपालन के लिए निगम द्वारा किए गए कार्यों की सराहना की है ।

 

           हिन्दी में सरकारी काम करने हेतु कर्मचारियों को प्रशिक्षित करने के लिए निगम के विभिन्न कार्यालयों में हिन्दी कार्यशालाओं का आयोजन किया जाता है । प्रत्येक वर्ष काफी संख्या में अधिकारी और कर्मचारी भारतीय खाद्य निगम में लागू विभिन्न प्रोत्साहन योजनाओं में भाग लेते हैं और उन्हें नकद पुरस्कारों से सम्मानित किया जाता है जिसके परिणामस्वरूप कार्यालयों में राजभाषा हिन्दी के प्रयोग में निरंतर वृद्धि हुई है।  राजभाषा नीति के प्रभावी कार्यान्वयन के लिये भारत सरकार द्वारा जारी नवीनतम नियमों / आदेशों/  निर्देशों की जानकारी देने के मद्देनजर पूरे देश में फैले भारतीय खाद्य निगम में कार्यरत हिन्दी अधिकारियों के लिए प्रति वर्ष अखिल भारतीय राजभाषा सेमीनार का आयोजन किया जाता है ।

 

           निगम के सभी कार्यालयों में संस्थापित सभी कंप्यूटरों में हिन्दी में कार्य करने की सुविधा उपलब्ध कराई गई है तथा हिन्दी में अधिकाधिक कार्य कंप्यूटरों के द्वारा किया जा रहा है । निगम के सभी कार्यालयों में नाम‑पट्ट, सूचना‑पट्ट, परिचय‑पत्र, साइन बोर्ड, रबर की मोहरें और सभी स्टेशनरी मदें आदि द्विभाषी रूप में प्रयोग में लाई जा रही हैं ।  निगम के जिन कार्यालयों में अधिकारियों और कर्मचारियों को हिन्दी का कार्यसाधक ज्ञान नहीं है उन्हें हिन्दी शिक्षण योजना केन्द्रों के माध्यम से हिन्दी का प्रशिक्षण दिलाया जा रहा है । हिन्दी प्रशिक्षण के बाद प्रशिक्षित कर्मचारियों से हिन्दी में काम करने की अपेक्षा की जाती है तथा उसके लिए समय‑समय पर हिन्दी कार्यशालाएं तथा पुनश्चर्या कार्यक्रम आयोजित कर उनको दैनिक कामकाज में हिन्दी के प्रयोग के लिए अभ्यास कराकर प्रेरित किया जाता है।

 

           निगम के प्रत्येक कार्यालय में राजभाषा कार्यान्वयन समिति गठित हैं और वे अपनेअपने कार्यालयों में राजभाषा हिन्दी के कार्यान्वयन की समीक्षा हेतु हर तिमाही में नियमित रूप से बैठकों का आयोजन करते हैं ।

 

           इस प्रकार देखा जाए तो भारतीय खाद्य निगम में राजभाषा नियमों का पालन किया जाता है तथा हम शत-प्रतिशत लक्ष्य प्राप्ति के लिए प्रयासरत हैं । इसके लिए हम सामूहिक रूप से प्रयास कर रहे हैं। हमारा लक्ष्य भारतीय खाद्य निगम को एक ऐसा उपक्रम बनाना है, जो राजभाषा नीति का शत-प्रतिशत अनुपालन करता हो।