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औद्योगिक संबंध श्रम

श्रमिक उत्पादकता पर अध्ययन

वर्ष 2010-2011 के लिए, भारतीय खाद्य निगम द्वारा उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के साथ हस्ताक्षरित सहमति ज्ञापन(एमओयू) के अनुसार, विभागीय कामगारों के संबंध में 50 किग्रा. बोरियों की हैंडलिंग के लिए प्रोत्साहन मजदूरी योजना बनाने तथा भारतीय खाद्य निगम के डिपुओं में छिटपुट वर्कलोड के उतार-चढ़ाव हेतु डीपीएस तथा विभागीय श्रेणी के कामगोरों के संबंध में कार्य के मानकों का सुझाव देने के लिए नेशनल प्रोडक्टिविटी काउंसिल को श्रमिक उत्पादकता(लेबर प्रोडक्टिविटी) पर किया गया अध्ययन प्रस्तुत किया गया है। नेशनल प्रोडक्टिविटी काउंसिल(एनपीसी) ने अपनी ड्राफ्ट रिपोर्ट प्रस्तुत की है तथा जिस पर अधिकारियों की टीम द्वारा विचार-विमर्श  किया गया। इस संबंध में अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी गई है तथा जो सीजीआईटी, नई दिल्ली के विचाराधीन है।

वर्ष 2012-13 के लिए भारतीय खाद्य निगम द्वारा उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के साथ हस्ताक्षरित सहमति ज्ञापन के अनुसार, यह निर्णय लिया गया है कि श्रमिक मुद्दों अर्थात् मैनपावर योजना, भर्ती नीति एवं अन्य मुद्दों के संबंध में अघ्ययन किया जाए। Delloite Touche Tohmatsu India Private Limited को "मैनपावर प्लनिंग तथा इंडक्शन पॉलिसी" पर अध्ययन करने का कार्य सौपा गया है। m/s Deloitte  द्वारा मैनपावार  प्लानिंग एंड इंडक्शन पॉलिसी पर किए गए अध्ययन की प्रस्तुत पर बोर्ड स्तरीय उप समिति द्वारा विचार-विमर्श किया गया तथा उसने बोर्ड को अपनी सिफारिशें तथा/टिप्पणियां प्रस्तुत कर दी है।

बोर्ड स्तरीय उप समिति की सिफारिश के संबंध में की गई अनुवर्ती कार्रवाई की स्थिति निदेशक बोर्ड की दिनांक:14.10.2015 को हुई 372वीं बैठक में रखी गई थी । बोर्ड ने, विचार-विमर्श के बाद निम्न संकल्प किया :-

 "श्रमिकों से संबंधित बोर्ड नोट में चिन्हित मामलों पर विचार-विमर्श किया गया और बोर्ड ने पाया कि यह महत्वपूर्ण है कि भारतीय खाद्य निगम मौजूदा संकट से बाहर आए और वर्तमान नीतिगत ऐसे विभिन्न मामलों, जिनपर वैचारिक मतभेद है, के गतिरोध को हल करने के लिए श्रमिक संगठनों के साथ वार्तालाप जारी रखे । बोर्ड ने यह भी परामर्श दिया कि आपसी स्वीकार्य हल पर पहुंचने के लिए एक व्यवहारिक और सकरात्मक सोच अपनाने की जरुरत है । यदि ऐसे प्रस्ताव मंत्रालय द्वारा दिए गए अधिदेश (मेनडेट) के दायरे के बाहर हैं तो ऐसे विशिष्ट प्रस्तावों को पूर्ण औचित्य और तर्क के साथ बोर्ड के समक्ष विचारार्थ रखा जाए जिससे कि इन प्रस्तावों को अनुमोदन हेतु खाद्य विभाग को भेजा जा सके ।" 

अध्यतन : 31.08.23